किताब से जुड़े इस मामले को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। इसी दौरान कुछ समाचार माध्यमों में यह जानकारी सामने आई कि दिल्ली पुलिस ने प्रकरण के संबंध में एक प्राथमिकी दर्ज की है। हालांकि, इस दावे की पुष्टि के लिए जब पुलिस अधिकारियों से संपर्क साधा गया, तो कोई स्पष्ट या आधिकारिक जवाब नहीं मिल पाया।दूसरी ओर, पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की जिस किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर विवाद खड़ा हुआ है, उसके प्रकाशक पेंगुइन इंडिया ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि यह पुस्तक अभी तक प्रकाशित नहीं की गई है। इसके बाद स्वयं नरवणे ने भी प्रकाशक के बयान की पुष्टि की। इसके बावजूद यह मामला शांत पड़ने के बजाय लगातार चर्चा और बहस का विषय बना हुआ है।

इस पूरे विवाद पर बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर कड़ा प्रहार किया। उनका कहना था कि जनरल एमएम नरवणे की ओर से दी गई सफ़ाई के बाद राहुल गांधी के आरोपों की हकीकत सामने आ चुकी है।सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि लोकसभा में राहुल गांधी ने जिस कथित कहानी को पेश किया था, उसे अब किताब के प्रकाशक और लेखक—दोनों ने ही नकार दिया है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि राहुल गांधी यह सवाल उठा रहे थे कि सच्चाई किसके साथ है, लेकिन अब जब दोनों पक्षों के बयान एक ही दिशा में हैं, तो यह स्पष्ट हो गया है कि तथ्यहीन बातें किस ओर से सामने आई थीं।इस मामले में राहुल गांधी ने मीडिया से बातचीत के दौरान नरवणे की कथित अप्रकाशित किताब को लेकर दर्ज दिल्ली पुलिस की एफआईआर पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने जनरल नरवणे के वर्ष 2023 के एक पुराने सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला देते हुए कहा कि इस पूरे प्रकरण में विरोधाभासी दावे सामने आ रहे हैं।राहुल गांधी का कहना था कि या तो जनरल नरवणे की बात सही नहीं है या फिर प्रकाशक पेंगुइन का बयान वास्तविकता से मेल नहीं खाता। उन्होंने यह भी जोड़ा कि एक पूर्व सेना प्रमुख के झूठ बोलने की संभावना उन्हें कम लगती है। राहुल गांधी ने यह तर्क दिया कि जहां प्रकाशक दावा कर रहा है कि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है, वहीं वही किताब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अमेज़न पर सूचीबद्ध दिखाई दे रही है। इसके साथ ही उन्होंने नरवणे के उस ट्वीट का उल्लेख किया, जिसमें किताब को वर्ष 2023 में उपलब्ध कराने की बात कही गई थी।

पेंगुइन इंडिया और जनरल एमएम नरवणे की ओर से दी गई सफ़ाई को समझने से पहले उस सोशल मीडिया पोस्ट पर नज़र डालना ज़रूरी है, जिसका हवाला कांग्रेस नेता राहुल गांधी दे रहे हैं।यह पोस्ट 15 दिसंबर 2023 की है, जिसमें नरवणे ने लिखा था कि उनकी किताब उपलब्ध है और पाठकों से दिए गए लिंक के ज़रिए उसे देखने की अपील की थी। पोस्ट के अंत में उन्होंने ‘हैपी रीडिंग’ और ‘जय हिंद’ जैसे शब्दों का भी इस्तेमाल किया था।राहुल गांधी ने इसी संदेश को आधार बनाकर सवाल उठाए थे। उनका तर्क था कि जब लेखक स्वयं किताब के उपलब्ध होने की बात कर रहे हैं, तो फिर प्रकाशक कंपनी यह क्यों कह रही है कि पुस्तक अब तक प्रकाशित नहीं हुई है।हालांकि, बाद में जनरल नरवणे ने स्वयं सामने आकर प्रकाशक पेंगुइन इंडिया के बयान की पुष्टि कर दी और कहा कि कंपनी की ओर से दिया गया स्पष्टीकरण सही है।

पिछले दो दिनों के दौरान इस विवाद को लेकर पेंगुइन इंडिया ने दो बार सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखा है। कंपनी की पहली प्रतिक्रिया 9 फ़रवरी को सामने आई थी, जब पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने एक आधिकारिक बयान जारी किया,अपने बयान में कंपनी ने कहा कि मौजूदा चर्चाओं और मीडिया में आई खबरों के मद्देनज़र यह स्पष्ट करना ज़रूरी है कि ‘फोर स्टार्स ऑफ़ डेस्टिनी’ को प्रकाशित करने का विशेष अधिकार केवल पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के पास है। कंपनी ने बताया कि इस किताब के लेखक भारत के पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे हैं।पेंगुइन ने यह भी साफ़ किया कि यह पुस्तक अभी तक प्रकाशित नहीं की गई है। बयान के अनुसार, किताब की कोई भी प्रति—चाहे वह मुद्रित हो या डिजिटल—अब तक न तो जारी की गई है, न बेची गई है और न ही आम पाठकों के लिए उपलब्ध कराई गई है।कंपनी का कहना है कि यदि कहीं भी किताब की पूरी प्रति या उसके अंश किसी भी रूप में—प्रिंट, डिजिटल, पीडीएफ़, ऑनलाइन या ऑफलाइन—प्रसारित हो रहे हैं, तो वह पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के कॉपीराइट का उल्लंघन है। साथ ही यह भी कहा गया कि ऐसे किसी भी अनधिकृत प्रसार को तत्काल रोका जाना चाहिए और कंपनी इस तरह की गतिविधियों में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखती है।        पेंगुइन इंडिया का कहना है कि ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के प्रकाशन से जुड़े सभी अधिकार सिर्फ उसी के पास हैं। कंपनी की दूसरी सफ़ाई उस वक्त सामने आई, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जनरल नरवणे के एक सोशल मीडिया पोस्ट का ज़िक्र करते हुए किताब के प्रकाशित होने पर सवाल खड़े किए थे,दूसरे बयान में पेंगुइन इंडिया ने भारत में किताबों के प्रकाशन की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। कंपनी के मुताबिक, किसी पुस्तक की घोषणा, उसका प्री-ऑर्डर के लिए सूचीबद्ध होना और उसका वास्तविक रूप से प्रकाशित होना—ये तीनों अलग-अलग चरण होते हैं। पेंगुइन ने स्पष्ट किया कि अमेज़न जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर किसी किताब का प्री-ऑर्डर के लिए दिखाई देना या भविष्य की रिलीज़ तारीख तय होना, यह साबित नहीं करता कि किताब प्रकाशित हो चुकी है। कंपनी के अनुसार, किसी किताब को तभी प्रकाशित माना जाता है जब वह रिटेल प्लेटफॉर्म पर सीधे बिक्री के लिए उपलब्ध हो।इसी बीच मंगलवार को जनरल एमएम नरवणे की ओर से भी एक पोस्ट सामने आया, जिसमें उन्होंने किताब की स्थिति को लेकर स्थिति साफ़ की। नरवणे ने कहा कि किताब का स्टेटस वही है, जो पेंगुइन इंडिया ने अपने बयान में बताया है।हालांकि, इन स्पष्टीकरणों के बावजूद किताब की उपलब्धता को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं। आरजेडी सांसद मनोज झा ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में दावा किया कि उन्होंने यह किताब पढ़ी है। उनका कहना था कि डिजिटल दौर में किसी भी जानकारी को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में दिल्ली पुलिस को बेवजह घसीटा जा रहा है और दर्ज की गई एफआईआर किसी इशारे या मंशा के तहत हुई है। साथ ही, पेंगुइन रैंडम हाउस के सर्कुलर का ज़िक्र करते हुए उन्होंने इस पर निराशा भी जताई।

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