लोकसभा में राजनीतिक माहौल उस समय और गरमा गया जब भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ एक सब्सटेंटिव मोशन पेश किया। दुबे ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने सदन में ऐसी बातें कहीं, जिससे देश को गुमराह किया गया।उन्होंने न केवल राहुल गांधी की संसद सदस्यता समाप्त करने की मांग की, बल्कि भविष्य में उनके चुनाव लड़ने पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की भी बात कही।इस पूरे विवाद पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि राहुल गांधी ने सदन के नियमों का उल्लंघन किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने एक अप्रकाशित किताब का उल्लेख किया, जो संसदीय नियमों के खिलाफ है।रिजिजू ने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने अपने भाषण के दौरान सरकार और प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप लगाए और ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिन्हें अनुचित माना गया। उन्होंने संकेत दिया कि इन मामलों को लेकर राहुल गांधी को नोटिस देने की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि प्राइवेट मेंबर निशिकांत दुबे एक सब्सटेंटिव मोशन लाए हैं, इसलिए अभी के लिए हम उस मोशन को हटा रहे हैं जो सरकार लाने वाली थी। कोई भी सांसद मोशन ला सकता है। सब्सटेंटिव मोशन के मंजूर होने के बाद, हम स्पीकर से बात करने के बाद तय करेंगे कि हम इसे प्रिविलेज कमेटी या एथिक्स कमेटी को भेज सकते हैं या सीधे हाउस में चर्चा के लिए ला सकते हैं। यह तय किया जाएगा।यह पहला मौका नहीं है जब राहुल गांधी की संसदीय सदस्यता पर संकट आया हो। वर्ष 2023 में सूरत की एक अदालत ने ‘मोदी उपनाम’ से संबंधित टिप्पणी के मामले में उन्हें दोषी ठहराते हुए दो साल की सजा सुनाई थी। यह मामला 2019 में दर्ज आपराधिक मानहानि से जुड़ा था।यह फैसला सूरत के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एचएच वर्मा की अदालत द्वारा सुनाया गया था। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 504 के तहत राहुल गांधी को दोषी माना। कोर्ट के अनुसार, उनकी टिप्पणी को जानबूझकर किया गया अपमान माना गया, जिससे शांति भंग होने की संभावना थी।इस सजा के बाद नियमों के अनुसार उनकी लोकसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई थी, जिससे देश की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो गया था।
