परिधि न्यूज़,
गुलाब चन्द्र यादव
आर एस एस अपनी स्थापना के सौ साल पूरे होने के मौके पर दिल्ली के विज्ञान भवन में व्याख्यानमाला का आयोजन किया, जिसकी अध्यक्षता खुद प्रमुख मोहन भागवत ने किया।
तीन दिवसीय व्याख्यानमाला का मकसद आर एस एस के सौ साल के सफर पर चर्चा करना, सौ साल में लिए गए फैसलों की सराहना करना, फैसलों के असर का आकलन करना, नाकामियों और कमियों को पॉइंट आउट करके भविष्य की रुपरेखा तैयार करना है। संगठन की सामाजिक और वैचारिक पहुंच बढ़ाने की योजनाएं बनाना और अलग-अलग समुदायों के साथ परस्पर संवाद करके एक-दूसरे की विचारधारा को समझने का प्रयास करना है। बैठक में आर एस एस शताब्दी वर्ष समारोह के आयोजन की तैयारी और आर्थिक-राजनीतिक चुनौतियों पर रणनीति भी बनाई जा रही है।

व्याख्यानमाला में राजनेताओं, जजों, राजदूतों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, कला, खेल, नौकरशाही, कूटनीति, मीडिया, स्टार्टअप सेक्टर के विशेषज्ञ और प्रभावशाली व्यक्ति बुलाए गए । बैठक में प्रमुख मोहन भागवत भाषण देंगे, वहीं आर एस एस से जुड़े कई मुद्दों पर विचार रखेंगे और विचार सुनेंगे।
पाकिस्तान-बांग्लादेश को छोड़कर अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान, नेपाल, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, दक्षिण अफ्रीका समेत कई मुस्लिम देशों के राजदूतों को बुलाया गया था।व्याख्यानमाला में केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, ज्योतिरादित्य सिंधिया, अनुप्रिया पटेल, केसी त्यागी, संजय झा, राम मोहन नायडू, कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों के नेताओं, अल्पसंख्यक समुदायों, मुसलमान, ईसाई, सिख और बौद्ध नेताओं को भी बुलाया गया साथ ही सभी राजनीतिक दलों को आमंत्रित किया गया था।
सौ साल पूरे होने के मौके पर आर एस एस की व्याख्यानमाला दिल्ली, बेंगलुरु, कोलकाता और मुंबई में भी होगी। बेंगलुरु और कोलकाता में नवंबर 2025 में और मुंबई में फरवरी 2026 में व्याख्यानमाला आयोजित हो सकती है।
