वारिसलीगंज सीट,दो बाहुबलियों की पत्नियों के बीच मुकाबला,

अरुणा देवी इस सीट पर लगातार तीसरी बार जीत कर हैट्रिक लगाने के लिए लड़ रही हैं,बिहार के वारिसलीगंज विधानसभा क्षेत्र से आरजेडी के टिकट पर अनीता देवी और बीजेपी के टिकट पर अरुणा देवी मैदान में हैं. ये दोनों ही बीते ज़माने के बाहुबलियों की पत्नियां हैं.
यह विधानसभा सीट नवादा लोकसभा क्षेत्र के अंदर आती है.अनीता, जेल ब्रेक कांड में 17 साल सज़ा काट चुके अशोक महतो की पत्नी हैं.वहीं, अरुणा देवी 90 और 2000 के दशक के बाहुबली अखिलेश सिंह की पत्नी हैं.अखिलेश सिंह को स्थानीय स्तर पर अखिलेश ‘सरदार’ के नाम से भी जाना जाता है और उनका नवादा, शेखपुरा, जमुई और नालंदा के कुछ हिस्से में प्रभाव था.बीते 20 साल से वारिसलीगंज सीट से अशोक महतो और अखिलेश सिंह के परिवार का कोई सदस्य ही जीतता आया है.इस दौरान अशोक महतो के भतीजे प्रदीप महतो और अखिलेश सिंह की पत्नी अरुणा देवी ही इस सीट से विधायक बने.
‘हमने हेलीकॉप्टर को ट्रैक्टर बना दिया है’
अशोक जी एक विचारधारा हैं’

जनता सबसे बड़ी बाहुबली है
लोग यहां बनने वाली सीमेंट की फ़ैक्ट्री का विरोध कर रहे हैं
पकरीबरांवा में तेजस्वी यादव अपनी सभा में हर परिवार को सरकारी नौकरी का वादा करते हैं, वो जीविका दीदी, पढ़ाई, कमाई, सिंचाई की बात करते हैं,अरुणा देवी सवाल करती हैं, “तेजस्वी यादव कहते हैं कि वो नौकरी बांटेंगे लेकिन उनकी क्षमता कहां है. हमारी सरकार बाहर कमाने जाने वाले नौजवान को यहीं रोज़गार देगी. हमारे विधानसभा क्षेत्र में बायोडीज़ल की फैक्ट्री लग रही है.”1600 करोड़ रुपये की सीमेंट की फ़ैक्ट्री लग रही है,चीनी मिल तो 1993 में बंद हुआ लालू जी की सरकार में. हम 20 बार सवाल किए विधानसभा में. लेकिन जब कुछ नहीं हुआ तो नवयुवक को रोज़गार तो मिलना ही है. इसलिए फ़ैक्ट्री खुली. सीमेंट की फ़ैक्ट्री में क्या बुराई है?”दरअसल अरुणा देवी सीमेंट फैक्ट्री का बचाव कर रही हैं, लेकिन वारिसलीगंज बाज़ार में इसको लेकर बहुत नाराज़गी है,यहां काम करने वाले राजू कुमार कहते हैं, “पहले चीनी मिल थी, अब सीमेंट की फ़ैक्ट्री. हमारे मरने का ऑर्डर आ गया है. हम पहले चीनी मिल में काम करते थे. सीमेंट फैक्ट्री खुलने से धूल का डर है. बगल में घर है. हम लोग कैसे रहेंगे?”बिंदेश्वरी सिंह भी कहते हैं, “हमारी तो सबसे बड़ी पूंजी चीनी मिल थी लेकिन उसको बंद करवा दिया गया. नीतीश कुमार ने उसकी जगह सीमेंट फैक्ट्री लगवा दी. किसानों ने धरना प्रदर्शन किया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. उसी से किसान, व्यापारी को फ़ायदा होता था. हमारे यहां शादी होती थी, पैसा नहीं रहता था तो कुछ रसीद व्यापारी को दे देते थे. सामान मिल जाता था.”
पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई का भी टोटा

वारिसलीगंज विधानसभा क्षेत्र में एक ऐसा कॉलेज तक नहीं है जहां पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई होती हो. नतीजा ये है कि पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए भी स्टूडेंट्स को पटना, गया और नालंदा ज़िले में जाना पड़ता है,अरुण सिंह कहते हैं, “यहां पीजी का कॉलेज ही नहीं है. या तो पटना जाइए या फिर गया.”वहीं नौजवान मोहित कुमार कहते हैं, “एक घर में बेरोज़गार बैठा हुआ है, हर घर में जॉब मिलना ज़रूरी है. यहां लोग शिक्षित ही नहीं हो पा रहे हैं. ऊपर से कोई व्यवस्था नहीं हो रही है.”वहीं वारिसलीगंज स्टेशन के पास बैठे दीपक कुमार कहते हैं, “हम लोग कॉलेज चाह रहे हैं. लेकिन एनडीए सरकार में बहुत विकास हुआ है. हम लोगों को विश्वास नहीं था कि रेल लाइन का दोहरीकरण होगा. लेकिन हो गया. हम मानते हैं कि बीजेपी की सरकार रहेगी तो हम लोगों का धीरे धीरे विकास होगा.”नीतीश कुमार सरकार की ओर से महिलाओं को दस हज़ार की मदद मिलने के सवाल पर मतदाता पुतुल कुमारी कहती हैं, “हम लोगों को दस हज़ार मिल भी जाएगा तो भी उसी को वोट देंगे जिसे देना है.”वारिसलीगंज में 11 नवंबर को मतदान होना है. साल 2000 और फरवरी 2005 का चुनाव अरुणा देवी ने जीता था लेकिन 2005 में ही अक्तूबर में जब विधानसभा के दोबारा चुनाव कराए गए तो उन्हें हार का सामना करना पड़ा. उस वक्त प्रदीप महतो ने जीत दर्ज की थी,अरुणा देवी 2015 और 2020 का चुनाव जीत चुकी हैं, यहां ये देखना होगा कि क्या वो इस बार जीत की हैट्रिक लगा पाएंगी?
