बिहार की राजनीति में पारिवारिक विरासत का प्रभाव लंबे समय से देखा जाता रहा है। राज्य में कई ऐसे राजनीतिक परिवार रहे हैं, जिनकी दूसरी और तीसरी पीढ़ी भी सक्रिय राजनीति में उतरकर अपना प्रभाव स्थापित कर चुकी है। इसी परंपरा के बीच अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के संभावित राजनीतिक प्रवेश को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।राज्य की राजनीति में अक्सर यह देखा गया है कि बड़े नेताओं ने अपने बाद अपनी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए परिवार के सदस्यों को सक्रिय राजनीति में उतारा है। कई मामलों में नेताओं के बेटे या परिवार के अन्य सदस्य चुनावी राजनीति में उतरकर न केवल अपने पिता की राजनीतिक जमीन को संभालते हैं, बल्कि समय के साथ अपनी अलग पहचान भी बना लेते हैं।इसी पृष्ठभूमि में अब नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर भी चर्चा का माहौल बना हुआ है। हालांकि अभी तक उनके राजनीतिक करियर को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस संभावना पर लगातार चर्चा हो रही है कि वे भविष्य में सक्रिय राजनीति का हिस्सा बन सकते हैं।
बिहार में पहले भी कई प्रमुख राजनीतिक परिवारों ने अपनी अगली पीढ़ी को राजनीति में आगे बढ़ाया है। ऐसे उदाहरणों में परिवार के युवा सदस्यों ने पार्टी संगठन से लेकर चुनावी राजनीति तक में सक्रिय भूमिका निभाई है। यही कारण है कि निशांत कुमार को लेकर भी राजनीतिक विश्लेषकों और कार्यकर्ताओं के बीच जिज्ञासा बनी हुई है।दरअसल, बिहार के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो अब तक कई ऐसे मुख्यमंत्री रहे हैं जिनके बेटे सक्रिय राजनीति में आए और कई ने राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान भी बनाई। इन नेताओं ने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को संभालते हुए अलग पहचान भी बनाने की कोशिश की। बिहार के सबसे चर्चित राजनीतिक परिवारों में लालू प्रसाद यादव और राबरी देवी का परिवार प्रमुख माना जाता है।राष्ट्रीय जनता दल से जुड़े इस परिवार का प्रभाव लंबे समय से राज्य की राजनीति में बना हुआ है। उनके दोनों बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव सक्रिय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। तेजस्वी यादव फिलहाल बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर सरकार के खिलाफ विपक्ष की आवाज बुलंद कर रहे हैं, जबकि तेज प्रताप यादव भी लगातार राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहते हैं और अपनी अलग कार्यशैली के कारण चर्चा में बने रहते हैं।इसी तरह बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के बेटे नितीश मिश्रा ने भी राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। वे भाजपा के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं और बिहार सरकार में मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। लंबे समय से सक्रिय राजनीति में रहने के कारण राज्य की राजनीति में उनकी एक प्रभावशाली छवि बनी हुई है।वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भागवत झा आज़ाद के बेटे कीर्ति आज़ाद का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। राजनीति में आने से पहले कीर्ति आज़ाद भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी के रूप में देशभर में प्रसिद्ध हुए थे। बाद में उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और कई बार सांसद के रूप में संसद में बिहार का प्रतिनिधित्व किया। खेल और राजनीति दोनों क्षेत्रों में उनकी अलग पहचान रही है।
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन भी सक्रिय राजनीति में हैं। संतोष सुमन हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं और बिहार सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। वे अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं और राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।इसी तरह बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री सत्येन्द्र नारायन सिन्हा के बेटे निखिल कुमार भी राजनीति में आए और कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। निखिल कुमार भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी रहे और बाद में राजनीति में सक्रिय होकर सांसद भी बने। इसके अलावा वे राज्यपाल जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर भी रह चुके हैं।
