10 नवंबर 2022 के बाद टी-20 में लगातार जीत दर्ज कर आत्मविश्वास से भरी टीम इंडिया को 22 फरवरी को करारा झटका लगा। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में दक्षिण अफ्रीका ने 188 रन का लक्ष्य रखा और भारतीय टीम 111 रन पर सिमट गई। 76 रन की यह हार टी-20 विश्व कप में भारत की अब तक की सबसे बड़ी पराजय बन गई।कप्तान सूर्यकुमार यादव ने मैच के बाद स्वीकार किया कि टीम पावरप्ले में ही पिछड़ गई थी। दरअसल, समस्या नई नहीं है। ओपनिंग जोड़ी लगातार नाकाम रही है—कई विकल्प होने के बावजूद पिछले 10 मैचों में एक भी ठोस शुरुआत नहीं मिल सकी। नंबर तीन पर भी अस्थिरता बनी हुई है, जिससे मध्यक्रम पर बेवजह दबाव बढ़ रहा है।स्पिन गेंदबाज़ी के खिलाफ भारतीय बल्लेबाज़ों की कमजोरी एक बार फिर उजागर हुई। केशव महाराज के एक ओवर ने मैच की दिशा बदल दी और भारत वापसी का मौका ही नहीं बना पाया। पूर्व तेज़ गेंदबाज़ इरफ़ान पठान ने भी साफ कहा कि टीम की बल्लेबाज़ी अपनी लय से दूर है।रणनीति पर भी सवाल उठ रहे हैं—उपकप्तान को बाहर रखना, शीर्ष क्रम में बाएँ हाथ के बल्लेबाज़ों की भरमार, और सही समय पर गेंदबाज़ी में बदलाव न करना। जब शुरुआती ओवरों में बढ़त मिली, तो उसे भुनाने में टीम चूक गई।अब समीकरण साफ हैं। सुपर-8 के बचे मुकाबलों में भारत को सिर्फ जीत नहीं, बल्कि बड़े अंतर से जीत चाहिए। एक और गलती टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखा सकती है।जीत की लय पर सवार टीम अचानक सवालों के घेरे में है। अब देखना है—क्या यह टीम दबाव में टूटेगी या चैंपियन की तरह पलटवार करेगी?
