अमेरिका के एक सरकारी आयोग ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम यानी यू एस सी आई आर एफ ने अपनी 2026 की वार्षिक रिपोर्ट में यह सुझाव दिया है। आयोग ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से कहा है कि आर एस एस पर लक्षित प्रतिबंध लगाए जाएं, जिनमें संगठन की संपत्ति जब्त करना और उसके सदस्यों के अमेरिका में प्रवेश पर रोक शामिल हो सकती है।आयोग का कहना है किआर एस एस भारत में धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार है या ऐसे मामलों को नजरअंदाज करता है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि आर एस एस भारतीय जनता पार्टी का वैचारिक संगठन है, जिसकी सरकार वर्तमान में केंद्र में है।
क्या है अमेरिका का धार्मिक आयोग
यू एस सी आई आर एफ एक स्वतंत्र अमेरिकी सरकारी आयोग है, जिसकी स्थापना 1998 में अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता कानून के तहत की गई थी। यह आयोग दुनिया भर में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति की निगरानी करता है और अमेरिका के राष्ट्रपति, विदेश मंत्री तथा कांग्रेस को नीतिगत सुझाव देता है। आयोग में कुल 9 सदस्य होते हैं, जिन्हें डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों दलों द्वारा नियुक्त किया जाता है।
रिपोर्ट में क्या कहा गया?
मार्च 2026 में जारी इस रिपोर्ट में वर्ष 2025 के दौरान वैश्विक धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति का आकलन किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति और खराब हुई है।आयोग ने आरोप लगाया है कि भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर मुस्लिम और ईसाई समुदाय के खिलाफ कानून बनाए गए और उन्हें निशाना बनाया गया। मस्जिदों, चर्च और अन्य धार्मिक स्थलों पर हमलों की घटनाएं भी सामने आईं।रिपोर्ट में कहा गया है कि कई मामलों में पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। गोहत्या कानूनों के नाम पर हमले, एंटी-कन्वर्जन कानूनों को सख्त करना और धार्मिक हिंसा की घटनाएं बढ़ने का भी जिक्र किया गया है।
इसके अलावा, कुछ प्रमुख मामलों का भी उल्लेख किया गया है, जैसे—CAA विरोधी प्रदर्शनकारियों की लंबी अवधि तक बिना ट्रायल गिरफ्तारी,महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र को लेकर हिंसा,ओडिशा में ईसाई परिवारों पर हमला,रोहिंग्या शरणार्थियों के साथ कथित दुर्व्यवहार,असम से मुस्लिम नागरिकों का निष्कासन
भारत को फिर CPC में डालने की सिफारिश
यह सातवीं बार है जब आयोग ने भारत को ‘कंट्री ऑफ पार्टिकुलर कंसर्न’ (CPC) घोषित करने की सिफारिश की है। CPC उन देशों को कहा जाता है जहां धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघन होते हैं। इस सूची में अफगानिस्तान, चीन, ईरान, पाकिस्तान और रूस जैसे देश भी शामिल हैं।
भारत की प्रतिक्रिया क्या है?
हालांकि इस बार भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इससे पहले सरकार ऐसे आरोपों को खारिज करती रही है। मार्च 2025 में विदेश मंत्रालय ने USCIRF की रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था।
क्यों अहम है यह रिपोर्ट?
यह रिपोर्ट भारत में धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस को तेज कर सकती है। हालांकि आयोग की सिफारिशें बाध्यकारी नहीं होतीं, लेकिन इनका असर अमेरिकी नीतियों पर पड़ सकता है। अगर अमेरिका इन सुझावों पर अमल करता है, तो भारत-अमेरिका संबंधों पर भी असर पड़ने की संभावना है।
