अम्बेडकरनगर जिले में कोतवाली अकबरपुर से महज एक किलोमीटर दूर अपने ही घर में सनकी स्वभाव वाले पति ने अपनी ही पत्नी की ह्त्या कर दिया, यह एक दर्द से भरी हृदय विदारक घटना थी, धारदार हथियार से हत्या करने वाला कोई और नहीं बल्कि उसका पति ही था जो उसे लगभग चौदह बरस पहले सात जन्मों तक साथ निभाने का वादा करके ले आया था, परन्तु सात जनम क्या वह एक ही जनम में पूरे उम्र तक साथ निभाने में फेल होते हुए वीभत्स घटना को अंजाम दे दिया,हत्यारा भाजपा का नगर मीडिया प्रभारी बताया जाता है, उसके फेसबुक अकाउंट में भाजपा नेताओं के साथ चित्र लगाए गयें हैं,जिससे पता चलता है कि वह उभरता हुआ एक राजनीतिक व्यक्ति भी है,
कौन है उमा शंकर सिंह
उमाशंकर सिंह के पिता वृषभान सिंह मदारभारी गाँव के रहने वाले हैं,क्षेत्रीय गांधी आश्रम अकबरपुर के रंगाई विभाग में काम करते थे, २०१४ में तत्कालीन गांधी आश्रम के मंत्री से मारपीट करने के कारण इन्हें निकाल दिया गया, वृषभान सिंह अवैध रूप से पत्नी बेटे,बहु और बेटे के दो बच्चों के साथ गांधी आश्रम में रहते चले आ रहे हैं,उनका अपना निजी मकान भी है जिसे उन्होंने किराये पर दिया है,गांधी आश्रम के कई कार्यकर्ताओं ने बताया कि फंड के बकाए को लेकर वर्तमान मंत्री के साथ उनके अच्छे सम्बन्ध नहीं है,लोंगों ने यह भी बताया कि बाप बेटे धौंस को बरकार रखने के लिए जिले के कुछ माफियों से राजनैतिक और व्यावाहारिक घनिष्ठ मित्रता कर लिए थे,वृषभान सिंह का गांधी आश्रम के उनके अपने सेवा अवधि में कोई बहुत अच्छा रिकार्ड नहीं रहा है,ऐसा गांधी आश्रम के बचे खुचे कार्यकर्ता कहते हैं,
वृषभान सिंह के पड़ोसी क्या कहते हैं,
वृषभान सिंह के पड़ोसियों ने नाम न छापने की शर्त पर परिधि न्यूज़ को बताया कि वृषभान सिंह के घर हमेशा लड़ाई झगडा होता रहता था, उमाशंकर सिंह और उनके बेटे अपने पारिवारिक मसले में किसी को बोलने नहीं देते थे,कभी कभी ११२ न पुलिस भी आयी है,पारिवारिक झगडे अकबरपुर कोतवाली तक चले गए थे,पुलिस के पास पति पत्नी के झगडे सुलझाने की कोई व्यवस्था नहीं है,अधिकतर समझा बुझाकर घर भेजने का काम कर देती है, इसमें भी उसने यही किया था| वृषभान सिंह के पड़ोसी कहते हैं कि मृतका को बाहर निकलते या किसी पराये पुरुष से बात करते हुए कभी नहीं देखा गया,स्कूल पढ़ाते या फिर बच्चों के साथ जाते हुए देखा गया है,कुछ लोंगों ने परिधि न्यूज़ को बताया कि उमाशंकर सिंह के ससुराल में संपत्ति को लेकर भी उनकी पत्नी से अधिकतर मारपीट होती थी,उमा शंकर सिंह की इच्छा थी कि सोनी सिंह उक्त जमीन को अपने पिता से बैनामा करा ले जिससे उसके दुःख दूर हो जाए और वह आर्थिक रूप से सबल होकर राजनीति में पैर जमा सके|
सामाजिक और व्यावहारिक रिश्ते वाले संबंधों पर मजबूत पकड़ रखने वाले महेश अग्रवाल कहते हैं, गांधी आश्रम अकबरपुर का परिसर स्वतंत्रता आंदोलन का गवाह है, स्वदेशी इसकी अवधारणा है, स्ववालंबन इसकी नींव है,रास्ट्रपिता महात्मा गांधी ने इस आश्रम में रूककर देशवासियों को खादी पहनने का विचार दिया, बापू जी जिस स्थान पर रुके, उनकी प्रतिमा के बगल एक महिला की निर्ममतापूर्वक उसी के पति ने ह्त्या कर दिया,हैवानियत भरे इस कृत्य की जितनी निंदा की जाए उतनी कम है,वे आगे कहते हैं जिला प्रशासन को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाना चाहिए और ऐसे अपराधों को रोकने के लिए कभी कभी निजी व सरकारी स्कूलों की महिला अध्यापिकाओं तथा उनके परिवार के लोंगों की संयुक्त बैठकें होनी चाहिए, जिसमें मनोवैज्ञानिक ढंग से प्रशिक्षण देना चाहिए,
गांधी आश्रम के सामने शरद बुक डिपो के नाम से मशहूर योगी अंकल की दूकान है जो काफी प्रसिद्द है, अव्यवस्था का शिकार हो रहे गांधी आश्रम की पीड़ा को वे बड़े ही नजदीक से देखते हैं, प्रोप्राइटर शरद कहते है,सोनी सिंह को मैं एक स्कूली शिक्षिका के रूप में जानता था, वे स्वभाव से बहुत अच्छी थीं अपने बच्चों के लिए कापी किताब खरीदने आया करती थीं, वे एक आदर्श शिक्षिका थीं,सोशल मीडिया और समाचार पत्रों में क्या लिखा जा रहा है,इसका कोई भाव नहीं है,घर के बाहर सड़क से स्कूल तक वे एक अच्छी शिक्षिका थीं,पति पत्नी में मनमुटाव यदि था उसे किसी अन्य रास्ते से हल किया जा सकता था,किसी की जान को लेकर नहीं|
आरोपी पुत्र के साथ साथ माता-पिता भी जेल में
आक्रोश में जी रहे दरिंदे की करतूते माता पिता को भी जेल के सलाखों तक ले गयी हैं,वही माता पिता जो जीवन के अंतिम डगर पर जीने के लिए जी रहे हैं,कोतवाली पुलिस ने सोनी सिंह के मायके वालों की तहरीर पर मुकद्दमा पंजीकृत करते हुए जेल भेज दिया है,सोनी सिंह अपनी दर्दनाक मृत्यु से पहले पुलिस के भी पास गयी थीं परन्तु पुलिस की कार्यशैली तों महान कवि जय शंकर की पंक्तियों में निहित है-
क्या कहती हो ठहरो नारी!
संकल्प अश्रु-जल-से-अपने।
तुम दान कर चुकी पहले ही
जीवन के सोने-से सपने।
नारी! तुम केवल श्रद्धा हो
विश्वास-रजत-नग पगतल में।
पीयूष-स्रोत-सी बहा करो
जीवन के सुंदर समतल में।
देवों की विजय, दानवों की
हारों का होता-युद्ध रहा।
संघर्ष सदा उर-अंतर में जीवित
रह नित्य-विरूद्ध रहा।
आँसू से भींगे अंचल पर
मन का सब कुछ रखना होगा-
तुमको अपनी स्मित रेखा से
यह संधिपत्र लिखना होगा।

