पटना:
Bihar की राजनीति इस समय एक अहम मोड़ पर खड़ी है। राज्य की सत्ता की कुर्सी फिलहाल खाली है और नए मुख्यमंत्री को लेकर सियासी हलकों में चर्चा और अटकलों का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक दलों के बीच बैठकों और रणनीति बनाने का सिलसिला जारी है।राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की खबरों के बीच सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर भी मंथन चल रहा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले दिनों में नए नेतृत्व का फैसला हो सकता है, जो राज्य की सरकार को आगे बढ़ाएगा। फिलहाल सभी की निगाहें राजनीतिक दलों के शीर्ष नेतृत्व और उनके फैसले पर टिकी हुई हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बिहार की राजनीति हमेशा से गठबंधन और बदलते समीकरणों के लिए जानी जाती रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री पद को लेकर अंतिम फैसला कई दौर की बातचीत और राजनीतिक संतुलन के बाद ही सामने आएगा।उधर विपक्ष भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है और सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि राज्य में राजनीतिक अस्थिरता का असर प्रशासनिक कामकाज पर भी पड़ सकता है।इस बीच राज्यपाल की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नए मुख्यमंत्री के चयन के बाद ही बिहार में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया पूरी होगी और राज्य की राजनीतिक स्थिति साफ हो सकेगी।
