राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) नेता तेजस्वी यादव का हालिया बयान कि “बीजेपी के विपरीत” बिहार में विपक्ष आगामी विधानसभा चुनाव में एक साफ-सुथरी छवि वाले मुख्यमंत्री चेहरे के साथ उतरेगा, कांग्रेस की आपत्ति से टकरा गया है,मंगलवार को कांग्रेस नेतृत्व ने इस मुद्दे पर फिर सवालों को टालते हुए सिर्फ इतना कहा कि गठबंधन के साझीदार “सही समय आने पर साथ बैठकर” मुख्यमंत्री उम्मीदवार पर फैसला करेंगे,अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरू का टालमटोल भरा जवाब इस बात को साफ करता है कि पार्टी तेजस्वी को इंडिया गठबंधन का सीएम चेहरा बनाकर चुनाव में जाने से हिचक रही है,अल्लावरू ने मीडिया से कहा, “जब वक्त आएगा, गठबंधन की सभी पार्टियां मिलकर (सीएम चेहरे पर) फैसला करेंगी. महागठबंधन पर सोचने में समय लगाने के बजाय मैं मीडिया से अपील करता हूं कि बिहार की जनता के मुद्दों पर, भारत की जनता के मुद्दों पर ध्यान दें, जैसे रोज़गार, अपराध, पेपर लीक, शराब माफिया.”कांग्रेस का यह साफ राजनीतिक विकल्प सामने न रखना भले ही उलझनभरा लगे, लेकिन बिहार कैंपेन में शामिल पार्टी के अंदरूनी लोग मानते हैं कि यह एक सोची-समझी रणनीति है,कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने दिप्रिंट को बताया, “ऐसा अनुभव है कि तेजस्वी को चेहरा घोषित करने पर गैर-यादव और गैर-प्रमुख जातियां हमारे खिलाफ एकजुट हो जाती हैं. यह पहले कई बार हो चुका है. पार्टी के भीतर राय है कि साफ घोषणा करने के बजाय अगर हम तटस्थ रहें तो किसी वर्ग को अलग-थलग करने से बच सकते हैं, लेकिन आरजेडी इतनी आसानी से मानने वाली नहीं है.”तेजस्वी लगातार दबाव बना रहे हैं. पिछले हफ्ते एक टीवी चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा, “थोड़ा इंतज़ार कीजिए. पांच-दस दिन की देरी से क्या फर्क पड़ता है? यह सीट बंटवारे के बाद होगा. क्या हम बिना (सीएम) चेहरे के लड़ेंगे? हम चेहरे के साथ ही लड़ेंगे. क्या हम बीजेपी हैं जो बिना सीएम चेहरे के चुनाव लड़ेंगे?”दोनों सहयोगियों के बीच यह टकराव उस समय सामने आया है जब सीट बंटवारे पर तनावपूर्ण बातचीत चल रही है.वहीं बिहार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह, जिन्हें तेजस्वी और उनके पिता लालू प्रसाद का करीबी माना जाता है, वे खुले तौर पर तेजस्वी को सीएम चेहरा बनाने की पैरवी कर रहे हैं.

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