भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) को बताया है कि उसके पास ऐसा कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि संभल की जामा मस्जिद किसी पूर्व संरचना को गिराकर बनाई गई थी या खाली जमीन पर निर्मित हुई थी।मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एएसआई ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके अभिलेखों में मस्जिद के निर्माण काल (1526) के समय जमीन के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज मौजूद नहीं हैं। यह जानकारी वकील सत्य प्रकाश यादव द्वारा दायर आरटीआई आवेदन के जवाब में दी गई।एएसआई ने अपने लिखित उत्तर में कहा कि संबंधित प्रश्नों पर उसके पास “कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।” हालांकि, विभाग ने बताया कि उसके रिकॉर्ड के अनुसार मस्जिद का निर्माण 1526 में हुआ और 1920 की राजपत्र अधिसूचना के बाद से यह संरचना संरक्षित स्मारक के रूप में दर्ज है।पहली अपील के दौरान एएसआई ने 2018 की एक घटना का उल्लेख किया, जब संरक्षित क्षेत्र में अवैध स्टील रेलिंग लगाने की कोशिश रोकी गई थी।सुनवाई में आयोग ने माना कि आरटीआई कानून के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण केवल उपलब्ध रिकॉर्ड साझा करने के लिए बाध्य हैं, नई जानकारी जुटाने के लिए नहीं। इसी आधार पर आयोग ने अपील खारिज कर दी।गौरतलब है कि जामा मस्जिद के इतिहास को लेकर मामला अदालत में विचाराधीन है। नवंबर 2024 में सर्वेक्षण के विरोध के दौरान हुई हिंसा के बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था।अपीलकर्ता सत्य प्रकाश यादव ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2021 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से जामा मस्जिद से जुड़ी जानकारी मांगते हुए आरटीआई आवेदन दायर किया था।मामले में केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने 23 फरवरी 2026 को अंतिम सुनवाई की। यादव का कहना है कि वे अब एएसआई से उपलब्ध अभिलेखों के अनुरूप शेष जानकारी मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
