राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष अब उनके काम करने के तरीक़े को भली-भांति समझ चुका है। प्रधानमंत्री ने व्यंग्यात्मक अंदाज़ में कहा कि बीते एक दशक में कई बार उन्हें सदन में बोलने से रोका गया, क्योंकि विपक्ष जानता है कि वह एक बार बोलना शुरू करते हैं तो रुकते नहीं।प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि इस बार कांग्रेस ने अनुभव से सीख लेते हुए अलग रणनीति अपनाई और उन्हें उम्मीद है कि विपक्ष को आगे भी ऐसी समझ मिलती रहेगी। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब एक दिन पहले लोकसभा में भारी हंगामे के चलते प्रधानमंत्री का प्रस्तावित भाषण नहीं हो सका था।राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक हालात पर भी बात की। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रही है और दूसरे विश्व युद्ध के बाद बना वैश्विक ढांचा अब कमजोर पड़ रहा है। प्रधानमंत्री के अनुसार, यदि मौजूदा घटनाओं का निष्पक्ष विश्लेषण किया जाए तो यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक शक्तियों का झुकाव भारत की ओर बढ़ रहा है। इस बीच लोकसभा में जारी गतिरोध को लेकर स्पीकर ओम बिरला ने विपक्ष के व्यवहार पर नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा कि सदन के भीतर हुई घटनाएं संसदीय परंपराओं के खिलाफ थीं। स्पीकर ने यह भी दावा किया कि उन्हें जानकारी मिली थी कि कुछ विपक्षी सदस्य प्रधानमंत्री के आसन तक पहुंच सकते थे, जिससे स्थिति गंभीर हो सकती थी। इसी कारण उन्होंने प्रधानमंत्री से सदन में न आने का अनुरोध किया।
स्पीकर के इस बयान पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री सदन में आने से बच रहे हैं और अब स्पीकर की आड़ ले रहे हैं। वहीं शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर दिए गए तर्क को महिला सांसदों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया।लोकसभा में हंगामे की मुख्य वजह कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की एक अप्रकाशित किताब के अंश पढ़ने की कोशिश रही।
पूरा मामला क्या है?
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बुधवार को संसद परिसर में पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की एक अप्रकाशित किताब की कॉपी लेकर पहुंचे। यह किताब पिछले चार दिनों से सियासी विवाद का केंद्र बनी हुई है, क्योंकि इसमें लद्दाख में चीन के साथ हुए सैन्य टकराव से जुड़े अहम दावे किए गए हैं।संसद परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि सरकार और स्पीकर दोनों यह कह रहे हैं कि यह “किताब नहीं है”, जबकि हकीकत यह है कि यह जनरल नरवणे द्वारा लिखी गई किताब है। उन्होंने कहा कि देश के हर युवा को यह किताब देखनी चाहिए, क्योंकि इसमें लद्दाख घटनाक्रम का पूरा ब्यौरा मौजूद है।
किताब में क्या दावा किया गया?
राहुल गांधी ने किताब के कुछ अंश पढ़ते हुए कहा कि इसमें एक बेहद अहम पंक्ति दर्ज है, जिसमें कथित तौर पर प्रधानमंत्री ने सेना को कहा था—“जो उचित समझो, वो करो।”राहुल के मुताबिक, किताब में यह भी लिखा है कि जब कैलाश रेंज पर चीनी टैंक पहुंचे, तब तत्कालीन सेना प्रमुख ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से संपर्क किया, लेकिन शुरुआत में कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। सेना प्रमुख ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर, एनएसए और रक्षा मंत्री से मार्गदर्शन मांगा, लेकिन देर तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
किताब क्यों है विवादों में?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह किताब जनवरी 2024 में प्रकाशित होनी थी, लेकिन उससे पहले ही भारतीय सेना इसकी आंतरिक जांच कर रही है। इसी वजह से इसे अभी आधिकारिक तौर पर प्रकाशित नहीं किया गया है।
स्पीकर और सरकार की आपत्ति
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को नियम 349(1) का हवाला देते हुए इसे सदन की कार्यवाही के खिलाफ बताया, जबकि विपक्ष का आरोप है कि सरकार संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा से बच रही है।लगातार शोर-शराबे के बीच राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को अंततः ध्वनि मत से पारित कर दिया गया, हालांकि विपक्षी सांसदों की नारेबाज़ी सदन में जारी रही।
