आईआईटी से पासआउट, यूपीएससी टॉपर लिस्ट में नाम और फिर भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच ‘आरोपी’ बनने तक अभिषेक प्रकाश  का सफर रहा है, उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक इतिहास में कुछ ऐसे अधिकारी रहे हैं, जिन्होंने कम समय में जितनी ऊंचाइयां छुईं, उतनी ही तेजी से वे विवादों के भंवर में भी फंस गए. 2006 बैच के आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश इस सूची  में सबसे ऊपर नजर आते हैं, अभिषेक प्रकाश का जन्म  बिहार के साधारण परिवार में हुआ है, आई आई टी  रुड़की से बीटेक करने के बाद  उन्होंने  यूपीएससी में 8वीं रैंक लाये, आरोपों में घिरने से पहले आईएएस अभिषेक प्रकाश के सफलता का यही डाटा था ,वे यूपी सीएम ऑफिस के भरोसेमंद अफसर थे, लखनऊ के जि

लाधिकारी  पद पर भी वे लंबे समय तक तैनात रहे|

आई ए एस अभिषेक प्रकाश की कहानी केवल फाइलों और दफ्तरों तक सीमित नहीं है,बल्कि वे फिल्मों की तरह एक साधारण  परिवार से निकलकर सफलता के साथ साथ हाई-प्रोफाइल मैरिज में पहुँचते हुए, जीवन में गहराता व्यक्तिगत विवाद और करियर को तबाह कर देने वाला ‘कमीशन कांड’ भी शामिल है, मार्च 2025 में हुए उनके निलंबन के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि उन पर शिकंजा और कसेगा, अब जनवरी 2026 में विशेष जांच दल (SIT) ने उन्हें आधिकारिक तौर पर ‘आरोपी’ बनाया है. इससे साफ हो गया है कि उनकी मुश्किलें जल्द खत्म नहीं होने वाली हैं, मेधावी छात्र से उत्तर प्रदेश के दागी अधिकारी बनने तक की आईएएस अभिषेक प्रकाश को सँभालने में काफी वक्ता लगेगा |

गाँव के परिवेश सेआई आई टी और आई ए एस बनने तक

       अभिषेक प्रकाश का जन्म बिहार के सिवान जिले में 21 दिसंबर 1982 को हुआ था,वे बचपन से ही पढ़ाई में बहुत कुशाग्र  थे. शुरुआती शिक्षा के बाद उन्होंने देश की सबसे कठिन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा पास की और रुड़की से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में बीटेक की डिग्री ली  इंजीनियरिंग के तुरंत बाद उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू किया और 2005 में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए पूरे भारत में 8वीं रैंक हासिल किया , 2006 में जब उन्होंने प्रशासनिक सेवा जॉइन की तो उन्हें नागालैंड कैडर मिला. उनकी शुरुआती छवि एक ईमानदार और मेहनती अफसर की थी,

प्यार और हाई-प्रोफाइल मैरिज,पत्नी से झगडा  और कैडर ट्रांसफर की कानूनी जंग

           अभिषेक प्रकाश आईएएस की निजी जिंदगी में अदिति सिंह (2009 बैच आईएएस) आयीं, उनकी दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई, जल्द ही उन्होंने शादी करने का फैसला किया, उस समय IAS अभिषेक नागालैंड कैडर में तैनात थे, जबकि आईएएस अदिति सिंह को यूपी कैडर अलॉट हुआ था,शादी के आधार पर अभिषेक ने नागालैंड छोड़कर उत्तर प्रदेश में अपनी प्रतिनियुक्ति कराई, कभी इस जोड़े को यूपी ब्यूरोक्रेसी का ‘पावर कपल’ माना जाता था, लेकिन यह सुखद समय ज्यादा दिन नहीं चल सका,अन्तर्निहित पारिवारिक विवाद घर से सड़क पर आ गया,शक के  आधार पर बढी कटुता से खिन्न अदिति सिंह ने शासन से अभिषेक की शिकायत की और उन्हें उनके मूल कैडर (नागालैंड) वापस भेजने की मांग की, अभिषेक प्रकाश के यूपी कैडर में स्थायी विलय  को लेकर सालों तक कानूनी लड़ाई चली,इस दौरान उनके व्यक्तिगत झगड़ों की खबरें अक्सर अखबारों की सुर्खियां बनती रहीं,सुर्ख़ियों से प्रभावित  दोनों ने अलग होने का फैसला किया और उनका तलाक हो गया, लेकिन इस विवाद ने प्रशासनिक हलकों में उनकी साख को काफी प्रभावित किया.जो दूसरों को उपदेश देता था वह खुद ही अपने उपदेश में फंस गया |

दोस्ती से रिश्वत  के जाल में  फंस गए जनाब

            उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने इन्वेस्ट यूपी का आयोजन किया था,अभिषेक प्रकाश के ऊपर आरोप है कि उन्होंने एक बड़ी सोलर कंपनी (SAEL Solar) के प्रोजेक्ट को मंजूरी देने और सब्सिडी दिलवाने के बदले अपने खास बिचौलिए निकांत जैन के जरिए 5% कमीशन की मांग की थी, शिकायतकर्ता ने ऑडियो और पुख्ता सबूतों के साथ मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचाया, जांच में पाया गया कि बिचौलिए ने साहब के नाम पर करोड़ों रुपये का लेन-देन किया था,इसी भ्रष्टाचार के आरोप में योगी सरकार ने मार्च 2025 में उन्हें सस्पेंड कर वेटिंग लिस्ट में डाल दिया था,अभिषेक प्रकाश के पतन का सबसे बड़ा कारण बना ‘इन्वेस्ट यूपी’  में उनका कार्यकाल |नए साल की शुरुआत यानी जनवरी 2026 में इस मामले ने नया मोड़ ले लिया है. SIT ने अपनी 1600 पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में पेश कर आईएएस अभिषेक प्रकाश को आरोपी के रूप में नामजद किया है. अब वे केवल सस्पेंडेड आईएएस अधिकारी नहीं, बल्कि रिश्वत केस के ‘आरोपी’ हैं. साथ ही, प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी मामले में एक्टिव है. जांच में उनकी करोड़ों की बेनामी संपत्तियों, लखनऊ से लेकर बरेली तक फैली जमीनों और अवैध निवेशों का पता चला है|

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