अपनी जिन्दगी को कुर्बान करते समय कुछ आवाजें ऐसी होती हैं जो मौत के बाद भी जीवित रहती हैं,रोहित वेमुला का आखिरी पत्र भी ऐसी ही एक आवाज है- जो दलित समुदाय से आने वाले छात्र की जाति आधारित भेदभाव की पीड़ा ने, उसके सपनों को  सामाजिक ‘दीवारों’ से टकराकर तोड़ दिया, जब सुप्रीम कोर्ट ने यू जी सी  के  नए’प्रमोशन ऑफ इक्विटी रेगुलेशंस, 2026′ पर रोक लगा दी है तो रोहित की यह चिट्ठी फिर से चर्चा में है, क्योंकि यह नियम रोहित और पायल तड़वी जैसे मामलों के सामने आने के बाद ही अस्तित्व में आए थे,रोहित के उस पत्र को गहराई से समझना पडेगा जिसमें एक युवा ने कहा-मेरा जन्म ही मेरा घातक हादसा है,सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के उन नए नियमों पर रोक लगा दी है और अब आगामी तारीखों में सुप्रीम कोर्ट उसकी सुनवाई करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ‘यूजीसी प्रमोशन ऑफ इक्विटी रेगुलेशंस, 2026’ के प्रावधानों में प्रथम दृष्टया अस्पष्टता है और इनके दुरुपयोग की आशंका है. कोर्ट ने इन नियमों के लागू होने पर रोक लगाते हुए सुझाव दिया है कि विशेषज्ञों की एक समिति इन नियमों में खामियों को दूर करने पर विचार कर सकती है. बता दें कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के लागू किए गए इन नए नियमों का उद्देश्य यह बताया गया था कि उच्च शिक्षा में समानता सुनिश्चित होगी. लेकिन, याचिकाकर्ताओं के तर्क इसके बिलकुल विपरीत थे और सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक नई नियमावली पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है. हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि 2012 के पुराने नियम ही फिलहाल लागू रहेंगे. लेकिन, सवाल यह कि आखिर यूजीसी को यह नई नियमावली क्यों लानी पड़ी? इस मामले का कनेक्शन रोहित वेमुला और पायल तड़वी के आत्महत्या किए जाने के मामले से जुड़ा है.

              यूजीसी की नई नियमावली क्यों आयी या फिर यूजीसी को, नई गाइडलाइन क्यों लानी पडी,घटनाओं को याद करते हुए मालूम पड़ता है, कि जनवरी 2025 में रोहित वेमुला और पायल तड़वी केस की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यू जी सी  को आदेश दिया था कि वो देश की सभी केंद्रीय, राज्य, निजी और डीम्ड यूनिवर्सिटीज से जानकारी जुटाए,साथ ही कोर्ट ने पूछा था कि क्या इन संस्थानों में इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेल बनाए गए हैं या नहीं,उस समय सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह का कहना है कि ये गाइडलाइंस अदालत के सीधे निर्देशों का नतीजा हैं और कैंपस में जातिगत भेदभाव रोकने की दिशा में एक जरूरी कदम हैं, रोहित वेमुला और पायल तड़वी के परिजन सुप्रीम कोर्ट गए थे, क्योंकि आरोपों के अनुसार, दोनों ने यूनिवर्सिटी और कॉलेज में प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली थी,इनके परिजनों की याचिका पर जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी से  नए नियम बनाने के आदेश दिए, ऐसे में सरकार ने पुराने नियमों में बदलाव करते हुए 13 जनवरी 2026 को नए नियम नोटिफाई कर दिए थे,नए नियम के दुरुपयोग की आशंका को देखते हुए जब सर्वोच्च न्यायालय ने अब जब इस पर तत्काल प्रभाव से रोक  लगा दिया तो रोहित वेमुला और पायल तड़वी से जुड़े मामले की चर्चा लगातार हो रही है, ऐसे में हम रोहित वेमुला की वो आखिरी चिट्ठी लाए हैं जो उनहोंने 17 जनवरी 2016 को अपनी मौत से पहले एक सुसाइड नोट (आत्महत्या पत्र) लिखा था. अंग्रेजी में लिखा हुआ यह काफी चर्चित हुआ था जिसमें उन्होंने अपनी व्यक्तिगत पीड़ा, अकेलापन, और जीवन के प्रति अपने विचारों को व्यक्त किया था.

रोहित का खालीपन और सितारों की यात्रा

आप जो मेरा पत्र पढ़ रहे हैं, अगर कुछ कर सकते हैं तो मुझे अपनी सात महीने की फेलोशिप मिलनी बाकी है. एक लाख 75 हजार रुपए. कृपया ये सुनिश्चित कर दें कि ये पैसा मेरे परिवार को मिल जाए. मुझे रामजी को चालीस हजार रुपए देने थे. उन्होंने कभी पैसे वापस नहीं मांगे. लेकिन प्लीज फेलोशिप के पैसे से रामजी को पैसे दे दें. मैं चाहूंगा कि मेरी शवयात्रा शांति से और चुपचाप हो. लोग ऐसा व्यवहार करें कि मैं आया था और चला गया. मेरे लिए आंसू न बहाए जाएं. आप जान जाएं कि मैं मर कर खुश हूं जीने से अधिक. ‘छाया से सितारों तक’…!

‘जय भीम’ से बदलाव की आखिरी पुकार!

उमा अन्ना, ये काम आपके कमरे में करने के लिए माफी चाहता हूं. अंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन परिवार, आप सब को निराश करने के लिए माफी. आप सबने मुझे बहुत प्यार किया. सबको भविष्य के लिए शुभकामना. आखिरी बार जय भीम….. मैं औपचारिकताएं लिखना भूल गया. ख़ुद को मारने के मेरे इस कृत्य के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है. किसी ने मुझे ऐसा करने के लिए भड़काया नहीं, न तो अपने कृत्य से और न ही अपने शब्दों से. ये मेरा फैसला है और मैं इसके लिए जिम्मेदार हूं. मेरे जाने के बाद मेरे दोस्तों और दुश्मनों को परेशान न किया जाए. रोहित.

प्रेम की नकली दुनिया और इंसान की कीमत

रोहित वेमुला ने यह पत्र अंग्रेजी में लिखा गया था और इसमें उन्होंने अपनी व्यक्तिगत पीड़ा, अकेलापन, और जीवन के प्रति अपने विचारों को व्यक्त किया. उन्होंने किसी व्यक्ति या संस्था को सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराया, बल्कि खुद को ही जिम्मेदार बताया. रोहित ने साफ कहा कि समस्या खुद में थी, न कि दूसरों में. उनका बचपन का अकेलापन, प्रेम की नकली दुनिया और इंसान की कीमत सिर्फ उसकी पहचान तक सिमट जाना-ये सब उन्होंने बड़े दार्शनिक अंदाज में बयां किया है, रोहित ने किसी को व्यक्तिगत रूप से दोष नहीं दिया, बल्कि सामाजिक व्यवस्था, पहचान की सीमाओं और अपने आंतरिक संघर्ष को व्यक्त किया. सबसे चर्चित पंक्ति “मेरा जन्म ही मेरा घातक हादसा है” आज भी दलित आंदोलन और सामाजिक न्याय की चर्चा में गूंजती है. रोहित वेमुला का यह पत्र दलित छात्रों और संस्थागत भेदभाव के खिलाफ आंदोलन का प्रतीक बन गया है. ‘मैं हमेशा जल्दी में था, एक जीवन शुरू करने के लिए बेचैन’ रोहित के इन शब्दों के ताप से निकली यूजीसी के नए नियम इसी भेदभाव को रोकने के लिए आए थे.

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