मध्य-पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने इजरायल पर क्लस्टर मिसाइलों से हमला कर क्षेत्रीय हालात को और गंभीर बना दिया। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, मिसाइलें इजरायल के कई सामरिक ठिकानों की ओर दागी गईं, जिनमें कुछ रिहायशी इलाकों के पास भी धमाके दर्ज किए गए।इजरायली रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों को हवा में ही निष्क्रिय करने का दावा किया है, लेकिन कुछ मिसाइलें लक्ष्य के आसपास गिरने की खबर है। हमले के बाद कई शहरों में सायरन बजाए गए और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए।

क्या हैं क्लस्टर मिसाइलें?

क्लस्टर मिसाइलें ऐसे हथियार होते हैं जो हवा में फटकर कई छोटे बमों (सबम्यूनिशन) में बंट जाते हैं। ये बड़े इलाके में असर डालते हैं, जिससे जान-माल का खतरा बढ़ जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन हथियारों के इस्तेमाल को लेकर पहले भी विवाद रहा है।

इजरायल की प्रतिक्रिया

इजरायल की सरकार ने हमले को “गंभीर उकसावे की कार्रवाई” करार दिया है और कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

क्षेत्रीय और वैश्विक प्रतिक्रिया

इस घटना के बाद पूरे मध्य-पूर्व में तनाव की स्थिति बन गई है। कई देशों ने संयम बरतने की अपील की है, वहीं संयुक्त राष्ट्र ने भी दोनों पक्षों से हालात को नियंत्रित करने का आग्रह किया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं संभली तो इसका व्यापक असर क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।फिलहाल दोनों देशों की सेनाएं सतर्क हैं और सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

इजरायल के विशेषज्ञों का दावा,अमेरिका और इजराईल को घुटने के बल लाएंगें

             इजरायल के सैन्य और सुरक्षा विशेषज्ञों ने हालिया मिसाइल हमलों के बाद संकेत दिया है कि ईरान की उन्नत क्लस्टर क्षमता के पीछे बाहरी तकनीकी सहयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इससे यह अटकलें तेज हो गई हैं कि कहीं रूस या चीन से सैन्य तकनीक अथवा ज्ञान का अप्रत्यक्ष हस्तांतरण तो नहीं हुआ है।रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने हाल के हमलों में खोर्रमशहर श्रेणी की मिसाइलों का इस्तेमाल किया, जो क्लस्टर मुनिशन्स ले जाने में सक्षम मानी जाती हैं। रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि जून 2025 में हुए 12-दिवसीय संघर्ष के बाद ईरान की मिसाइल मारक क्षमता और सटीकता में उल्लेखनीय सुधार दिखाई दे रहा है।हालांकि रूस और चीन ने ईरान के साथ मजबूत आर्थिक और कूटनीतिक संबंध बनाए रखे हैं, लेकिन दोनों देशों ने अब तक प्रत्यक्ष सैन्य सहायता देने से सार्वजनिक रूप से परहेज किया है। इसके बावजूद विशेषज्ञ यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या तकनीकी सहयोग, रक्षा अनुसंधान या सैन्य प्रशिक्षण के स्तर पर किसी प्रकार का ज्ञान हस्तांतरण हुआ है।इजरायली विश्लेषकों का मानना है कि यदि क्लस्टर सिस्टम्स की रेंज, सटीकता और तैनाती क्षमता में वाकई सुधार हुआ है, तो यह केवल घरेलू विकास का परिणाम नहीं हो सकता। हालांकि इस संबंध में कोई ठोस अंतरराष्ट्रीय प्रमाण सामने नहीं आया है।इस घटनाक्रम ने पहले से ही तनावग्रस्त मध्य-पूर्व को और जटिल बना दिया है। फिलहाल, स्थिति कूटनीतिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर संवेदनशील बनी हुई है।

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