घोटाले के मुख्य आरोपी क्यों मर जाते हैं
चित्रकूट के कोषागार में हुए 120 करोड़ रुपए के घोटाले के मुख्य आरोपी की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई,ऐसा संदीप श्रीवास्तव के भाई सचिन श्रीवास्तव का कहना है, पुलिस हिरासत में पूछताछ करते समय संदीप श्रीवास्तव को किसी अस्पताल में भर्त्ती कराने के लिए पुलिस ने उन्हें बुलाया था,पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी चित्रकूट का कहना है, कि 18 अक्टूबर की शाम करीब 5 बजे चित्रकूट कोतवाली में संदीप श्रीवास्तव की तबियत बिगड़ गयी, पुलिस का कहना है कि उसे बेचैनी और हाई ब्लडप्रेशर की शिकायत हुई थी।पुलिस संदीप को तुरंत जिला अस्पताल ले गई। हालत गंभीर होने पर एएसपी सतपाल सिंह, सीएमओ और सीएमएस की मौजूदगी में उसे प्रयागराज के स्वरूप रानी मेडिकल कॉलेज (SRN) रेफर किया गया। वहां रविवार शाम करीब 5 बजे संदीप की मौत हो गई। 
मृतक के भाई सचिन श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि संदीप से पूछताछ के बाद उसकी मौत हुई। इसकी जिम्मेदारी पुलिस की है। 18 अक्टूबर की सुबह पुलिस ने मुख्य आरोपी अवधेश प्रताप सिंह, विकास सिंह सचान और अशोक वर्मा को हिरासत में लिया था। देर रात संदीप को भी कोतवाली लाया गया। घरवालों का यह भी कहना है कि मुख्य आरोपियों समेत करीब 20 लोगों को कोतवाली में बैठाने के बावजूद किसी की गिरफ्तारी कागजों में दर्ज नहीं की गई थी।
अखिलेश यादव ने गंभीर सवाल उठाये
इस मामले पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया X पर पोस्ट किया। लिखा- चित्रकूट ट्रेजरी में हुए करोड़ों के घोटाले के मामले में मुख्य आरोपी की हिरासत में मौत एक बेहद गंभीर मुद्दा है। इतना बड़ा घोटाला कोई अकेले नहीं कर सकता। इसमें कई लोगों की संलिप्तता के उजागर होने की आशंका रही होगी। इसीलिए इसे सामान्य मौत न मानकर निष्पक्ष जांच हो और सभी दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो।
अवकाश प्राप्त शिक्षक की पत्नी पेंशन रुकने पर ट्रेजरी पहुंची
चित्रकूट में 120 करोड़ रुपए का पेंशन घोटाला तब सामने आया जब एक रिटायर्ड टीचर की पत्नी की पेंशन रुकी, तो वो 6 दिन पहले 13 अक्टूबर (सोमवार) को ट्रेजरी में इसका पता लगाने पहुंचीं। उन्हें बताया गया कि उनका खाता सीज है, क्योंकि उसमें 31 लाख रुपए का फ्रॉड हुआ है। महिला ने इसकी शिकायत पुलिस से की।ट्रेजरी के सहायक अकाउंटेंट और ट्रेजरर ने रिटायर्ड कर्मचारी के साथ मिलकर रिटायर्ड शिक्षकों के खाते में कई बार में ये रकम भेजी। बाद में उनसे मिलकर पैसा निकाल लिया।पुलिस जांच में पता चला कि घोटाले में महिला का भाई भी शामिल है। वह ट्रेजरी के आरोपी अकाउंटेंट के साथ मिला हुआ है। मामला सामने आने के बाद 95 संदिग्ध खातों को ऑडिट टीम ने सीज कर दिया। इन्ही खातों में पेंशन की रकम भेजकर घोटाला किया गया। ट्रेजरी ऑफिस के वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह ने आनन-फानन में 17 अक्टूबर को 99 लोगों पर FIR दर्ज कराई।

चित्मरकूट जिले की मऊ तहसील क्षेत्र के गांव खंडेहा में 65 साल की कमला देवी रहती हैं। उनके पति राजबहादुर सरकारी टीचर थे। 50 साल की उम्र में राजबहादुर की मौत हो गई। इसके बाद उनके बेटे को मृतक आश्रित कोटे से नौकरी मिल गई। जबकि, कमला देवी को पेंशन मिलने लगी।कमला देवी ने बताया- 6 महीने से मेरी पेंशन नहीं आ रही थी। इसके बारे में पता करने मैं कई बार बैंक गई। वहां बताया गया कि पेंशन अभी नहीं आई है। 13 अक्टूबर को मैं फिर बैंक गई, तो पता चला कि मेरा खाता सीज कर दिया गया है। बैंकवालों ने बताया कि खाता क्यों सीज हुआ है, इसके बारे में ट्रेजरी ऑफिस जाकर पता करिए।इसके बाद वो ट्रेजरी ऑफिस गईं और कर्मचारियों ने इस बारे में पूछा। एक बाबू ने बताया कि मेरे खाते में 31 लाख रुपए गलत तरीके से भेजे गए हैं, जो निकाल भी लिए गए हैं। इसलिए खाता सीज है। ये रकम मुझे लौटानी होगी, नहीं तो कार्रवाई होगी। ये सुनते ही मैं डर गई। कमला देवी ने बताया कि कौशांबी में रहने वाले मेरे भाई ओमप्रकाश ने चित्रकूट में लालता रोड पर नया घर बनवाया है। ओमप्रकाश ने बताया था कि ये पैसे उसने भेजे हैं। मैंने भरोसे में आकर 31 लाख रुपए निकालकर उसको दे दिए।
काल करने पर भाई ने फोन काट दिया
कमला ने भाई ओमप्रकाश को कॉल करके पैसे के बारे में पूछा। इस पर उसने अपने पैसे बताकर कॉल काट दी। तब कमला को शक हुआ। कमला ने अपने भाई के खिलाफ कर्वी थाने में शिकायत दी। इसके बाद पुलिस ने उसके घर पर छापा मारा, तो वह भाग गया।पुलिस ने जांच के लिए ट्रेजरी ऑफिस में संपर्क किया, तो जाकर पता चला कि कमला के खाते समेत 95 रिटायर्ड शिक्षकों के खाते में इसी तरीके से 120 करोड़ का फ्रॉड किया गया है। इन खातों में कभी 31 लाख, तो कभी 45 लाख भेजकर रिटायर्ड टीचरों से संपर्क कर पैसों की बंदरबांट की गई।वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह ने बताया- ओमप्रकाश ने पहले भी कई रिटायर शिक्षकों और उनकी पत्नियों के खातों में सरकारी राशि डलवाकर निकाल ली थी। कमला देवी ने मऊ थाने में शिकायत दी है।
घोटाले की जांच चल रही- वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह
ऑडिट टीम ने घोटाला पकड़ा था, जिसकी गोपनीय तरीके से जांच चल रही है। इसमें ट्रेजरी का सहायक लेखाकार (असिस्टेंट अकाउंटेंट) संदीप श्रीवास्तव, अकाउंटेंट अशोक कुमार, रिटायर्ड सहायक लेखाकार अवधेश कुमार और कमला देवी के भाई ओमप्रकाश ने मिलकर कई रिटायर्ड शिक्षकों के खाते में ये रकम डलवाई है।अवधेश कुमार रिटायरमेंट के बाद ट्रेजरी में संविदा पर काम कर रहा था। ये सभी लंबे समय से ट्रेजरी में पेंशनर्स के खातों में करोड़ों का हेर-फेर कर रहे थे। संदिग्ध 95 खातों को सीज कर दिया गया है। जांच में पता चला कि यह खेल 7 साल से चल रहा था।एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन बैंक, आर्यावर्त बैंक के खातों में पैसा भेजा जा रहा था। किसी के खाते में एक बार में ही 45 लाख और किसी के खाते में 30 लाख की रकम पहुंच गई। वित्तीय वर्ष 2023-24 का ऑडिट करने आई टीम ने इस मामले का खुलासा किया। अभी तक इस पूरे मामले में 22 लाख रुपए रिकवर हुए हैं।घोटालेबाज रिटायर शिक्षकों के खाते में पैसा डाल रहे थे। उनको कुछ कमीशन देकर उनके खाते से पैसा निकाल लिया जाता था। कमला के भाई ने कई रिटायर्ड शिक्षकों के खातों में रकम भिजवाई। बाद में उन्हें इनकम टैक्स बचाने का झांसा देकर पैसे वापस मांगे। इसके बदले में उन्हें भी कमीशन दिया गया।
