लद्दाख की राजधानी लेह में बुधवार को दिन भर हुई हिंसक झड़पों में 4 लोगों की जान चली गई और कम से कम 80 लोग जख्मी हो गए। यह हिंसा लेह अपेक्स बॉडी(LAB) की ओर से आयोजित बंद के दौरान भड़की, जो इसे राज्य बनाने को लेकर प्रदर्शन कर रही है।
- क्या है छठी अनुसूची, जिसकी मांग को लेकर लद्दाख में मचा इतना बवाल; लागू हुआ तो क्या होंगे बदलाव
लद्दाख के लोगों को यह डर भी सताने लगा है कि UT बनने के बाद, बाहरी लोग उनकी जमीनें खरीद सकते हैं और उनके संसाधनों पर कब्ज़ा कर सकते हैं। ऐसे में छठी अनुसूची लागू होने से उन्हें अपनी भूमि और संसाधनों पर नियंत्रण और संरक्षण मिल जाएगा।केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और इस केंद्र शासित प्रदेश को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग पर हजारों युवाओं ने बुधवार को लेह की सड़कों पर हंगामा, आगजनी, हिंसा और उपद्रव किया। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा बलों के साथ हिंसक झड़प हो गई, जिसमें अब तक चार लोगों की मौत की खबर है, जबकि इन झड़पों में 80 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। गुरुवार को पुलिस और अर्धसैनिक बलों द्वारा कर्फ्यू का सख्ती से पालन कराए जाने के दौरान कम से कम 50 लोगों को हिरासत में लिया गया है।अमूमन शांत रहने वाले इस इलाके में लोग अपनी चार सूत्रां मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए थे। प्रदर्शनकारियों की जो चार मांगे हैं, उनमें लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने, लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल कराने, लद्दाख में लोकसभा सीटें बढ़ाकर दो करने और लद्दाख की जनजातियों को आदिवासी का दर्जा देना शामिल है।छठी अनुसूची भारतीय संविधान की एक अहम अनुसूची है, जो पूर्वोत्तर भारत के कुछ आदिवासी क्षेत्रों को स्वायत्तता प्रदान करती है, ताकि उनकी संस्कृति, जमीन और संसाधनों की रक्षा की जा सके। यह अनुसूची आदिवासी बहुल पहाड़ी चार राज्यों- असम, मेघालय, त्रिपुरा, और मिजोरम में लागू है। यह जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित है जो इन समुदायों को अपनी पहचान और परंपराओं को बनाए रखने में मदद करती है। इसके तहत स्वायत्त जिला परिषदों (Autonomous District Councils – ADCs) का गठन किया जाता है, जो स्थानीय स्तर पर भूमि, जंगल, शिक्षा और टैक्स जैसे मामलों पर कानून बना सकती हैं।

