दिल्ली की कथित आबकारी (शराब) नीति मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को मिली राहत के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने 974 पन्नों की विस्तृत अपील दायर की है। जांच एजेंसी ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए कहा है कि आदेश तथ्यों की “चुनिंदा पढ़ाई”  पर आधारित है।एजेंसी का आरोप है कि ट्रायल कोर्ट ने केस डायरी, गवाहों के बयान और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के कुछ हिस्सों को नजरअंदाज किया।सी बी आई  के अनुसार, उपलब्ध सामग्री प्रथमदृष्टया साजिश और कथित अनियमितताओं की ओर इशारा करती है।अपील में कहा गया है कि अदालत ने जांच के अहम पहलुओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया।केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 2022 के दिल्ली आबकारी मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए विस्तृत अपील दाखिल की है। एजेंसी ने 27 फरवरी को अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों को दी गई राहत को “कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण” और “स्पष्ट रूप से गलत” बताया है।सीबीआई का कहना है कि विशेष जज (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) जितेंद्र सिंह ने आदेश पारित करते समय मामले की सुनवाई ऐसे की, मानो यह अंतिम चरण का परीक्षण हो। एजेंसी के अनुसार, अदालत ने कथित साजिश के विभिन्न पहलुओं को अलग-अलग परखा, जबकि उन्हें समग्र रूप से देखने की आवश्यकता थी।अपील में यह भी कहा गया है कि अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों का पूर्ण मूल्यांकन नहीं किया। जांच एजेंसी का आरोप है कि कुछ महत्वपूर्ण सबूतों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया, जो आरोपियों की भूमिका और जिम्मेदारी की ओर संकेत करते हैं। अब उच्च अदालत में इस अपील पर सुनवाई होगी, जहां मामले के तथ्यों और कानून के पहलुओं पर दोबारा विचार किया जाएगा।

कोर्ट ने राहत क्यों दी थी?

ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल को राहत देते हुए माना था कि गिरफ्तारी और हिरासत के औचित्य पर सवाल उठते हैं।जांच एजेंसी आरोपों को पुष्ट करने के लिए पर्याप्त ठोस आधार पेश नहीं कर सकी।

आगे क्या?

अब मामला उच्च अदालत में विचाराधीन है, जहां CBI की विस्तृत अपील और बचाव पक्ष की दलीलों पर सुनवाई होगी। अगली सुनवाई में यह तय होगा कि ट्रायल कोर्ट का आदेश बरकरार रहेगा या उसमें बदलाव किया जाएगा।यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों ही दृष्टि से अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसका असर राष्ट्रीय राजनीति और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी पड़ सकता है।

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