ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच ईरान मुद्दे को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। ट्रंप ने ईरान पर अमेरिका-इज़रायल की कार्रवाई में ब्रिटेन की शुरुआती हिचक को लेकर स्टार्मर की आलोचना की है, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया है।ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के बीच यह बयान ऐसे समय आया है, जब स्टार्मर वॉशिंगटन के साथ संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहे थे। ब्रिटिश अख़बार The Sun को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि पहले दोनों देशों के संबंध बेहद मजबूत थे, लेकिन अब यूरोप के अन्य देशों के साथ अमेरिका के रिश्ते ज्यादा बेहतर हैं। उन्होंने माना कि ब्रिटेन के साथ संबंध पहले जैसे नहीं रहे।बताया जा रहा है कि 28 फरवरी से शुरू अमेरिकी हमलों के दौरान ब्रिटेन ने शुरुआत में अपने सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी थी। बाद में इंग्लैंड और हिंद महासागर स्थित डिएगो गार्सिया बेस से ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों और भंडारण ठिकानों पर कार्रवाई की मंजूरी दी गई, हालांकि अन्य लक्ष्यों पर हमले की अनुमति नहीं दी गई।
साइप्रस के अक्रोतिरी स्थित ब्रिटिश सैन्य अड्डे पर ईरानी ड्रोन हमले के बाद भी ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने स्पष्ट किया है कि उनका देश “आक्रामक सैन्य कार्रवाई” में शामिल नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन ‘आसमान से शासन परिवर्तन’ की नीति का समर्थन नहीं करता।2 मार्च को हाउस ऑफ कॉमन्स में बोलते हुए स्टार्मर ने कहा कि किसी भी सैन्य कदम के लिए ठोस कानूनी आधार और स्पष्ट योजना जरूरी है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि डोनाल्ड ट्रंप ब्रिटेन के शुरुआती फैसले से असहमत थे, लेकिन राष्ट्रीय हित सर्वोपरि है।ब्रिटिश मीडिया ने इस टकराव को प्रतीकात्मक बताया है। अखबार Financial Times ने इसे फिल्म Love Actually के एक दृश्य से जोड़ा, जिसमें ब्रिटिश प्रधानमंत्री अमेरिकी दबाव का सामना करता है।तनाव की पृष्ठभूमि में ट्रंप की ग्रीनलैंड पर टिप्पणी और चागोस द्वीप समूह समझौते की आलोचना भी शामिल है। पूर्व राजनयिक पीटर रिकेट्स ने The Observer से कहा कि ट्रंप प्रशासन अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति अपनी प्रतिबद्धता कमजोर करता दिख रहा है।इस बीच यूरोप में भी मतभेद उभरे हैं। मार्क रुटे ने अमेरिकी कार्रवाई का समर्थन किया, जबकि पेड्रो सांचेज़ ने इसे खतरनाक बताया। ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने संयुक्त बयान में हमलों में प्रत्यक्ष भागीदारी से इनकार करते हुए ‘अनुपातिक रक्षात्मक कदमों’ का समर्थन किया।घरेलू स्तर पर भी राय बंटी हुई है। कंजर्वेटिव नेता केमी बैडेनॉक ने अमेरिका के समर्थन की बात कही, जबकि विदेश मंत्री स्टीफन डौटी ने अमेरिका-ब्रिटेन के ‘विशेष संबंध’ को अब भी मजबूत बताया।
