केन्द्र ने हमारे सब्र का अपमान किया,भाजपा  के खिलाफ गुस्सा’ सुलगते आक्रोश में लद्दाख आग बन गया

  • लेह:  72 साल के त्सेरिंग आंगचुक और 60 साल ताशी डोलमा रात में भूख हड़ताल के दौरान बेहोश होकर गिर पड़े और उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाना पड़ा, तो हमेशा शांत रहने वाले लद्दाख को झकझोर दिया,राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के प्रावधानों की मांग से हत्ताश और निराश हो चुके आंदोलन में कई युवा लद्दाखी अलग-थलग ही रह रहे थे, आंगचुक एवं डोलमा की हालत पर गुस्सा, जोशीले भाषणों और भावनात्मक अपीलों से और भड़क उठा , बुधवार को नवांग डोरजे स्तोबदान (एनडीएस) मैदान में हुए जुलूस में करीब 5,000 लोग शामिल हो गए.लेकिन यह एकजुटता जल्द ही गुस्से में बदल गई, हाथों में केरोसिन की बोतलें, डंडे और सरिए लिए एक समूह लेह की आमतौर पर शांत सड़कों पर निकल पड़ा. शांतिपूर्ण प्रदर्शन अचानक हिंसा में बदल गया, जिसकी उम्मीद सुरक्षा बलों ने भी नहीं की थी.बुधवार की हिंसा को किसने भड़काया और क्या यह पहले से योजनाबद्ध थी—ये सवाल अब भी बने हुए हैं. वहीं लद्दाख प्रशासन और प्रदर्शनकारी अपने-अपने कदमों का बचाव कर रहे हैं. पुलिस फायरिंग में कम से कम चार लोग, जिनमें एक पूर्व सैनिक भी शामिल है, मारे गए और 70 लोग घायल हुए जिनमें कम से कम 30 पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बल के जवान भी हैं,तो क्या यह खुफिया तंत्र की नाकामी थी? लद्दाख में तैनात एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर मीडिया से कहा, “हमें कुछ जानकारी थी कि बाहरी लोग मौजूद हैं, लेकिन यहां तक के विरोध-प्रदर्शन हमेशा शांतिपूर्ण रहे हैं, बलों को उम्मीद नहीं थी कि बिना उकसावे के पत्थरबाजी और हमले होंगें , लेह के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) स्तानजिन नोरबू ने बताया कि 23 सितंबर को बड़े पैमाने पर प्रदर्शन का आह्वान किया गया था, उन्होंने कहा, “लेह एपेक्स बॉडी के यूथ को-ऑर्डिनेटर स्तानजिन चोफेल और उपाध्यक्ष रिगजिन डोरजे ने भावनात्मक भाषण दिए और जनता से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की.”उन्होंने आगे बताया, “सोशल मीडिया और आपसी बातचीत के जरिए बड़े पैमाने पर जुटान शुरू हो गया, नेताओं ने युवाओं से कहा, ‘देखो, बुजुर्ग लद्दाख के लिए बलिदान दे रहे हैं.’”एसएसपी नोरबू के अनुसार, एनडीएस मैदान में भूख हड़ताल में रोज़ाना महज़ 140 से 400 लोग आते थे, लेकिन बुधवार को भीड़ बढ़ गई। उन्होंने बताया कि वांगचुक और कांग्रेस पार्षद फुंतसोग स्तानजिन त्सेपग और स्मानला दोरजे नुरबू के भाषणों का वीडियो फुटेज पुलिस के पास है, जिनमें कुछ ने यह तक कहा कि वे भूख हड़ताल में विश्वास नहीं करते.वांगचुक को शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया. उनके खिलाफ छह अलग-अलग दंगों और आगज़नी की घटनाओं में भारतीय न्याय संहिता (बीएनसी) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज है,उन्हें आरोपित बनाया गया है,उनके अलावा कम से कम 40 लोगों को, जिनमें पूर्व सैनिक भी शामिल हैं, हिंसा से जुड़े मामलों में पकड़ा गया है,वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जांचकर्ता दो ऐसे लोगों की तलाश कर रहे हैं जिनका किसी राजनीतिक दल से सीधा संबंध नहीं है, लेकिन वे कथित तौर पर नागरिक समाज समूहों के साथ जुड़े हो सकते हैं, जो इस हिंसा से ‘लिंक्ड’ हैं|

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