जलवायु परिवर्तन में वैज्ञानिक खेती ही किसान की रक्षा करेगी: सीएम योगी,
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कृषि को खुशहाली का माध्यम बनाने पर जोर दिया है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव को कृषि के लिए गंभीर चुनौती बताया है। उन्होंने वैज्ञानिक खेती, शोध और डिमॉन्स्ट्रेशन के माध्यम से किसानों को तैयार करने की जरूरत पर जोर दिया।
जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि पर बढ़ते खतरे को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरी चिंता जताई है। लखनऊ में आयोजित कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) के 36वें स्थापना दिवस समारोह में उन्होंने कहा कि प्रदेश के 15 से 16 जिलों में सामान्य से बेहद कम वर्षा दर्ज की गई है, जबकि कुछ राज्यों में असामान्य रूप से अधिक बारिश हो रही है। इन असंतुलित मौसमी हालातों से निपटने के लिए अब वैज्ञानिक खेती, फसल चक्र और जलवायु-अनुकूल बीजों पर गंभीरता से काम करने का वक्त आ गया है। उन्होंने कृषि विश्वविद्यालयों, विज्ञान केंद्रों और अनुसंधान संस्थानों से अपील की कि वे किसानों तक शोध को पहुंचाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को तेज करें। प्रदेश की कृषि को पलायन नहीं, बल्कि समृद्धि का माध्यम बनाना होगा। कृषि आज भी प्रदेश में सर्वाधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र है। तीन करोड़ से अधिक किसान इससे प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं, जबकि एमएसएमई क्षेत्र 1.65 करोड़ लोगों को रोजगार दे रहा है। लखनऊ में उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) के 36वें स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, एफपीओ और युवा प्रतिभाओं को सम्मानित किया और विभिन्न पुस्तिकाओं व न्यूज़ लेटर का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की भूमि, जलवायु और प्राकृतिक संसाधन कृषि विकास के लिए अत्यंत अनुकूल हैं, लेकिन वैज्ञानिक शोध और उसके व्यवहारिक उपयोग के बीच अब भी बड़ी खाई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के केवल 25 से 30 प्रतिशत किसान ही वैज्ञानिक अनुसंधान का लाभ प्रभावी ढंग से खेती में ले पा रहे हैं। इसके पीछे कारण है कि डिमॉन्स्ट्रेशन और प्रशिक्षण किसानों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाए हैं। उन्होंने कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान केंद्रों और कृषि विज्ञान केंद्रों से आग्रह किया कि वे किसानों को क्षेत्रीय जलवायु और मिट्टी के अनुसार नई तकनीक से अवगत कराएं और उन्हें व्यवहारिक प्रशिक्षण दें।