मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए नामांकन की चर्चा ने बिहार की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। राजनीतिक गलियारों में इसे राज्य की सत्ता और सियासी समीकरणों में संभावित बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।विश्लेषकों का मानना है कि अगर नीतीश कुमार राज्यसभा की ओर रुख करते हैं तो यह केवल व्यक्तिगत राजनीतिक निर्णय नहीं होगा, बल्कि इससे बिहार की सत्ता संरचना और नेतृत्व में बड़े परिवर्तन की भूमिका भी तैयार हो सकती है।इधर विपक्षी दल इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा की रणनीति का हिस्सा बता रहे हैं। उनका आरोप है कि राज्यसभा भेजने की तैयारी दरअसल मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार को किनारे करने की राजनीतिक कवायद हो सकती है। वहीं सत्तारूढ़ गठबंधन के नेता इसे सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया बताते हुए किसी भी तरह के सत्ता परिवर्तन की अटकलों को खारिज कर रहे हैं।इस बीच बिहार की राजनीति में अटकलों और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति का बड़ा केंद्र बन सकता है और इसके साथ ही सत्ता के नए समीकरण भी उभर सकते हैं।

 नीतीश कुमार (जदयू)

बिहार के सबसे अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं।कई बार बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और राज्य की राजनीति में तीन दशकों से अधिक समय से सक्रिय हैं।समाजवादी राजनीति से शुरुआत की और बाद में जनता दल (यूनाइटेड) के प्रमुख नेता बने।केंद्र में रेल मंत्री, कृषि मंत्री और कई महत्वपूर्ण पद संभाल चुके हैं।अब राज्यसभा के जरिए राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने की चर्चा है।


राम नाथ ठाकुर  (जदयू)

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी नेता कर्पूरी ठाकुर  के पुत्र हैं।लंबे समय से जदयू की राजनीति में सक्रिय हैं और पिछड़े वर्ग की राजनीति का प्रतिनिधित्व करते हैं।पहले भी राज्यसभा सांसद रह चुके हैं और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं।


नितिन नबीन  (भाजपा)

बिहार भाजपा के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं।कई बार विधायक रह चुके हैं और राज्य सरकार में मंत्री पद भी संभाल चुके हैं।संगठन और चुनावी रणनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण पार्टी ने उन्हें राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया।


 सिवेशराम   (भाजपा)

भाजपा के संगठनात्मक ढांचे से जुड़े नेता माने जाते हैं।पार्टी के अंदर लंबे समय से सक्रिय रहने और सामाजिक प्रतिनिधित्व के आधार पर उन्हें उम्मीदवार बनाया गया है।


उपेन्द्र कुशवाहा  (राष्ट्रीय लोक मोर्चा / एनडीए)

बिहार की कुशवाहा-कोइरी राजनीति के प्रमुख चेहरों में से एक।पहले केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं और कई बार दल बदलने के कारण भी चर्चा में रहे।फिलहाल राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख हैं और एनडीए के सहयोगी दल के रूप में राज्यसभा चुनाव में मैदान में हैं।


अमरेन्द्र धारी सिंह  (राजद)

उद्योगपति पृष्ठभूमि से आने वाले नेता और राष्ट्रीय जनता दल से जुड़े हुए हैं।पार्टी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।महागठबंधन की ओर से राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाए गए हैं।


बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए हो रहे चुनाव में एनडीए और महागठबंधन दोनों ने अपने-अपने सामाजिक और राजनीतिक समीकरण साधते हुए उम्मीदवार उतारे हैं। इन नामों से साफ है कि चुनाव सिर्फ संसदीय सीट का नहीं, बल्कि बिहार की भविष्य की सियासत और सत्ता संतुलन का भी संकेत दे रहा है।


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