राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार स्थित मेवाड़ यूनिवर्सिटी में बीएससी नर्सिंग कोर्स की मान्यता को लेकर विवाद अब गंभीर रूप ले चुका है। अपनी डिग्री के भविष्य को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे 33 कश्मीरी छात्रों को विश्वविद्यालय प्रशासन ने निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद छात्रों में आक्रोश और बढ़ गया है।विश्वविद्यालय एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह शैक्षणिक उपलब्धियां नहीं, बल्कि छात्रों का भविष्य और उनका आंदोलन है। बीएससी नर्सिंग कोर्स में अध्ययनरत 50 से अधिक कश्मीरी छात्रों का करियर अनिश्चितता में फंस गया है। छात्रों का आरोप है कि जिस कोर्स में वे पढ़ाई कर रहे हैं, उसे न तो राजस्थान नर्सिंग काउंसिल (RNC) और न ही इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) से आवश्यक मान्यता प्राप्त है।छात्र बाबर के अनुसार, वे 2022 बैच के छात्र हैं और वर्तमान में अंतिम वर्ष में अध्ययन कर रहे हैं। मार्च में उनकी अंतिम परीक्षाएं प्रस्तावित हैं, लेकिन अब तक कोर्स को मान्यता नहीं मिली है। उनका कहना है कि यदि समय पर मान्यता नहीं मिली, तो उनकी डिग्री का कोई मूल्य नहीं रह जाएगा। ऐसे में वे न तो नर्सिंग काउंसिल में पंजीकरण करा सकेंगे और न ही किसी नौकरी के लिए आवेदन कर पाएंगे।छात्रों ने बताया कि वर्ष 2024 में भी उन्होंने इसी मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। उस समय विश्वविद्यालय प्रशासन ने न्यायालय में लिखित रूप से आश्वासन दिया था कि यदि 4 दिसंबर 2024 तक मान्यता नहीं मिलती है, तो छात्रों को समान छात्रवृत्ति के साथ किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। हालांकि, छात्रों का आरोप है कि वर्ष 2026 तक भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।अपने भविष्य को लेकर चिंतित छात्रों ने प्रदर्शन करते हुए केंद्र और राज्य सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो उनका पूरा करियर प्रभावित हो सकता है। प्रदर्शन के दौरान गंगरार पुलिस मौके पर पहुंची और छात्रों को धरना स्थल से हटाया गया। इस दौरान छात्रों और पुलिस के बीच तीखी बहस भी हुई।छात्रों ने सरकार और संबंधित नियामक संस्थाओं से अपील की है कि जल्द से जल्द इस मामले का समाधान निकाला जाए, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित रह सके।
